मध्यप्रदेश में अपराधों में हर दिन बढ़ोतरी हो रही है और इसका खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ा रहा है, लेकिन प्रतीत होता है कि प्रदेश की पुलिस दबंग अपराधियों के आगे बेबस है। प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चैहान भले ही यह दावा करते हो कि प्रदेश में अपराधों की रोकथाम के लिये हर संभव प्रयास किये जा रहे है या फिर पुलिस को खुली छूट दे रखी हो, बावजूद इसके अपराधों पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। ऐसा नहीं है कि पुलिस प्रशासन अपराधो को रोकने का प्रयास नहीं करती है, लेकिन जिस तरह से प्रयास होना चाहिये वह नाकाफी सिद्ध होते प्रतीत होते है। लूट, चोरी, डाका, हत्या जैसे अपराध होना तो आम बात हो चली है तो वहीं रेप जैसे अपराध भी हो रहे है। हाल ही में भोपाल में एक नाबलिग के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। बताया जाता है कि इस मामले में एक किसी बड़े अधिकारी का पुत्र भी शामिल है, खैर यह तो पुलिस को ही छानबीन करना है, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या प्रदेश के मुखिया की अपराध मुक्त प्रदेश की परिकल्पना आखिर कब तक साकार हो सकेगी या फिर नतीजा ढांक के तीन पात ही बना रहेगा। सुबह सबेरे अखबार उठाते ही एक या दो ऐसे समाचार होते है जो किसी न किसी अपराध से ही जुड़े रहते है। ऐसे समाचार पढ़कर निश्चित ही लोगों के मन में यह प्रश्न उठता होगा कि क्या हमारा मध्यप्रदेश भी उन राज्यों की तरह हो चला है जहां अपराध होना सामान्य बात होती है। यह प्रदेश सुख शांति का कायल है, अपराधों को तो यहां के लोग बिल्कुल ही पसंद नहीं करते है, परंतु पुलिस की दबंगता और अधिक हो तो निश्चित ही अपराधों पर नियंत्रण हो सकता है। वर्दी का खौफ अपराधियों पर होने की जरूरत है, इसमें कोई दोराय नहीं होना चाहिये।