नई दिल्लीः मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो ने अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशन की चुनिदा संपत्तियों को खरीदने का ऐलान किया है. खरीदी जाने वाली संपत्तियों मे स्पैक्ट्रम, टावर, ऑप्टिक फाइबर केबल नेटवर्क और मीडिया कनवर्जेंस नोट्स शामिल है. बहरहाल, अभी ये साफ नहीं है कि इस सौदे की कीमत क्या है. ध्यान रहे कि इसी हफ्ते अनिल अंबानी ने ऐलान किया था कि रिलायंस कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजिक डेब रिस्ट्रक्चरिंग यानी एसडीआर से बाहर निकल रही है. इसी के साथ उन्होंने लेनदारों को मार्च 2018 तक कर्ज चुकाने और कुल कर्ज में 25 हजार करोड़ रुपये तक की कमी का भरोसा दिलाया.

 

खरीद से मिली रकम का इस्तेमाल रिलायंस कम्युनिकेशन कर्ज चुकाने में करेगी. इस तरह के करार का ये पहला मौका नहीं है, इसके पहले मुकेश अंबानी ने अपना मोबाइल कारोबार चलाने के लिए अनिल अंबानी की कंपनी से स्पैक्ट्रम और ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क लिया था.
रिलायंस जियो ने एक बयान जारी कर कहा कि रिलायंस कम्युनिकेशन की संपत्तियों के लिए दो स्तरों पर बोली लगाने की प्रक्रिया पूरी की गयी जिसमें रिलायंस जियो ने बाकी दावेदारों से बाजी मारी. जियो को उम्मीद है कि इन सुविधाओं को हासिल करने से उसे अपने वायरलेस और फाइबर आधारित सेवाओं को बड़े पैमाने पर फैलाने में मदद मिलेगी. जियो ने बीते साल इंटरनेट आधारित मोबाइल सेवा (वोल्टे) शुरु की. मुफ्त बातचीत और बेहद कम कीमत पर डेटा की वजह से जियो के ग्राहकों की संख्या अब 15 करोड़ पर पहुंच गयी है जबकि बाजार की सबसे बड़ी कंपनी एयरटेल के ग्राहकों की संख्या 28 करोड़ के आसपास है.

 

करार के मुताबिक, रिलायंस जियो को रिलायंस कम्युनिकेशन और उसकी सहयोगियों के

 

– 800/900/1800/2100 मेगाहर्टज बैंड में 4जी के 122.4 मेगाहर्टज स्पैक्ट्रम हासिल होंगे

 

– इसके अलावा 43 हजार टावर मिलेंगे

 

– साथ ही 1.78 लाख रुट किलोमीटर फाइबर और

 

– 248 मीडिया कनवर्जेंस नोड्स भी हासिल होंगे.

 

उधर, रिलायंस कम्युनिकेशन ने अपने बयान में कहा कि पूरा सौदा चरणबद्ध तरीके से जनवरी से मार्च के बीच पूरा हो जाने की उम्मीद है. हालांकि ये सबकुछ इस बात पर भी निर्भर करेगा कि नियामक संस्थाओं और लेनदारों की अनुमति कब मिलती है. करार के मुताबिक, भुगतान नकद में होगा और इसमें दूरसंचार विभाग को स्पैक्ट्रम के बकाये के लिए अदा की जाने वाली रकम भी शामिल होगी. वहीं रिलायंस जियो का कहना है कि गोपनीयता की शर्तों की वजह से उचित समय पर बाकी बातों का ब्यौरा सार्वजनिक होगा. माना जा रहा है कि इस खरीदारी के पीछे मुकेश अंबानी की कोशिश है कि कर्ज में डूबे भाई अनिल अंबानी को कैसे उबारा जाए.