देहरादून, [जेएनएन]: लोहड़ी यानी उत्साह, उमंग और उल्लास का पर्व। यह त्योहार सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। वैसे तो यह पर्व सिक्ख धर्म से जुड़ा हुआ है, लेकिन इसे हर समुदाय हर्षोल्लास के साथ मनाता है। ये पर्व खासतौर पर फसल से जुड़ा हुआ पर्व है।

लोहड़ी पर्व की पूर्व संध्या पर श्री गुरूद्वारा साहिब डाकरा की ओर से भव्य नगर कीर्तन की अगुवाई पंज प्यारों ने की। कीर्तन में फूलों से सजी पालकी और शबद-कीर्तनों से लोग निहाल हुए। ‘जो बोले सो निहाल’ के जयघोष से वातावरण गूंजता रहा। वहीं गतका में अखाड़ों के बच्चों ने शक्ति-प्रदर्शन किया और हैरतअंगेज करतबों से सभी को रोमांचित किया।

श्री गुरूद्वारा साहिब डाकरा से कैंट बोर्ड कार्यालय चैक, गढ़ी कैंट चैक एवं डाकरा के श्रद्धालुओं और व्यापारियों ने नगर कीर्तन का फूलों के साथ स्वागत किया। यात्रा श्री गुरूद्वारा साहिब डाकरा से कैंट बोर्ड कार्यालय होते हुए गुरूद्वारा परिसर में ही संपन्न हुई। इस अवसर पर गुरूद्वारा कमेटी के सदस्य देवेंद्र पाल सिंह, भाई गुरकीरत सिंह, हरबंश सिंह सोढी, रोहतरस सिंह आदि मौजूद रहे।

वहीं, दूसरी ओर लोहड़ी पर्व को खास तरह से मनाने के लिए हर जगह तैयारियां जोरों पर हैं। शहर में मूंगफली, रेवड़ी की दुकानें सजी हैं। शुक्रवार देर शाम तक लोग खूब खरीदारी करते रहे।

क्यों मनार्इ जाती है लोहड़ी   

लोहड़ी पर्व आपसी भाईचारे एवं सद्भाव का त्योहार है। यह त्योहार खासतौर पर फसल की बुआई और उसकी कटाई से जुड़ा हुआ होता है। नई फसल के आगमन के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाला यह पर्व किसानों के लिए भी उल्लास का अवसर होता है।

कैसे मनार्इ जाती है लोहड़ी

लोहड़ी पर्व पर प्रज्वलित अग्नि की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। पूजा-अर्चना के बाद मूंगफली, गजक, रेवड़ी, मक्का के दाने का प्रसाद वितरित किया जाता है। इसके बाद चलता है गीत-संगीत का दौर और लोग खूब खुशियां मनाते हैं।