भारत में गहने सफेद दाग की बड़ी वजह है। अंगूठी, हार, पायजेब शरीर पर रगड़ पैदा करते हैं। हमेशा ढके रहने की वजह से इन जगहों पर सफेद दाग होने की आशंका रहती है। पश्चिमी देशों में लोग सांवला होना चाहते हैं। इसके लिए वे क्लीनिकों में अच्छा खासा पैसा खर्च करते हैं, लेकिन हमारे यहां स्थिति बिलकुल अलग है। हमें चाहिए कि हम वैसी ही त्वचा को प्यार करें, जो भगवान ने हमें दी है।

यह बात पिगमेंट्री डिसआर्डर सोसायटी के आयोजन पिगमेंट्रीकॉन-2017 के दूसरे दिन विशेषज्ञों ने कही। मुख्य अतिथि इंटरनेशनल सोसायटी ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट के अध्यक्ष अमेरिका के डॉ. जार्ज रिजनर ने भारत के डॉक्टरों की तारीफ करते हुए कहा कि यहां के डॉक्टर किसी भी दूसरे देश के डॉक्टरों को टक्कर देने में दक्ष हैं। भारत में मेडिकल टूरिज्म तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिका के लोग भी अब यहां आकर इलाज कराने के बारे में सोचने लगे हैं।

इस मौके पर इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट, वेनेरोलॉजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट के अध्यक्ष डॉ. योगेश मारफतिया ने बताया कि भारत में सफेद दाग की बड़ी वजह गहने हैं। जिस जगह गहने पहने जाते हैं वहां सूर्य की रोशनी बिलकुल नहीं पहुंचती। धीरे-धीरे वहां एक निशान बन जाता है। समय रहते ध्यान नहीं दिया जाए तो यह सफेद दाग में तब्दील हो जाता है।

डॉ. मारफतिया ने कहा कि माता-पिता दोनों को सफेद दाग होने पर उनकी संतान को यह बीमारी हो इसकी आशंका करीब 13 प्रतिशत होती है, लेकिन माता-पिता दोनों में से किसी एक को होने पर यह आशंका 7 प्रतिशत रह जाती है। सफेद दाग को लेकर हमारे देश में अब भी बहुत-सी भ्रांतियां हैं।

विदेशी होना चाहते हैं सांवला

डॉ. रिजनर ने कहा कि पश्चिमी देशों में लोग सांवला होना चाहते हैं। इसके लिए वे मोटी रकम खर्च करने को भी तैयार हैं। विदेशों में विशेष मेडिकल कैंप आयोजित होते हैं। सफेद दाग के इलाज पर विशेषज्ञों ने बताया कि अब इसके इलाज के लिए नई तकनीकें आ रही हैं। विकसित दवा आ रही हैं।

मेलिनोसाईट किरीटोनिसाईट कल्चर ट्रांसफार्म भी किए जा रहे हैं। इसमें शरीर के किसी हिस्से से छोटी-सी साईज की चमड़ी निकालकर सफेद दाग पर लगा दी जाती है। धीरे-धीरे यह चमड़ी विकसित होते हुए पूरे सफेद दाग पर फैल जाती है और दाग खत्म हो जाता है। रविवार को कॉन्फ्रेंस का अंतिम दिन है। इस दिन विशेषज्ञ झुर्रियों और लांछन को हटाने के लिए उपलब्ध आधुनिक तकनीकों की जानकारी देंगे।