नई दिल्ली । द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका ने पहली बार भारत को ‘ग्लोबल पावर’ यानी ‘वैश्विक शक्ति’ के रूप में मान्यता दी है। हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी नई राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का एलान करते हुए कहा कि भारत संसार में वैश्विक शक्ति के रूप में उभर चुका है। अभी तक भारत के बारे में यही कहा जाता था कि वह दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय ताकत है, लेकिन सच कहा जाए तो अमेरिका कभी भारत को महत्व नहीं देता था। परन्तु पहली बार अमेरिका ने माना है कि भारत पूरी तरह बदल गया है और उसे हर हालत में वैश्विक शक्ति माना जाना चाहिए।

अमेरिका और भारत के रिश्ते
पीछे मुड़कर देखने से लगता है कि द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति के बाद और शीतयुद्ध के दौरान अमेरिका का रवैया हमेशा भारत के खिलाफ रहा। असल में अंग्रेजों ने भारत को आजादी तो दे दी थी परंतु इस सच से समझौता नहीं कर पाए थे कि भारत अब उनका गुलाम देश नहीं रहा। इसलिए मनमाने तरीके से उन्होंने भारत का विभाजन कर दिया। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अमेरिका एक सर्वशक्तिमान देश के रूप में उभरा था। उसे उकसा दिया कि वह पाकिस्तान का पक्ष ले और भारत को परेशान करे। हुआ भी यही। अमेरिका ने जी भरकर भारत को परेशान किया और सुरक्षा परिषद में तथा अन्यत्र पाकिस्तान का साथ दिया।

जब संसार दो खेमों में बंटा था

शीतयुद्ध के दौरान संसार दो खेमों में बंटा हुआ था। एक की अगुआई अमेरिका कर रहा था और दूसरे की सोवियत रूस। इस दौरान भारत ने ‘गुटनिरपेक्ष नीति’ का प्रतिपादन किया था जिसकी खिल्ली अमेरिका ने उड़ाई थी। अमेरिका कहता था कि यह गुटनिरपेक्ष नीति निर्थक है। असल में भारत सोवियत रूस का पिछलग्गू है। भारत ने ऐसे अनेक प्रमाण दिए जब यह कहा गया कि उसने रूस और अमेरिका से बराबर की दूरी बना रखी है, लेकिन अमेरिका इस बात को मानने को ही तैयार नहीं होता था। 50 के दशक में अमेरिका ने पाकिस्तान को भरपूर आधुनिकतम हथियारों से लैस कर दिया और उसे भरपूर आर्थिक सहायता देता रहा। भारत ने बार बार कहा कि यह हथियारों और पैसों की मदद पाकिस्तान भारत के खिलाफ इस्तेमाल करेगा। मगर अमेरिका ने बार बार भारत को आश्वस्त किया कि यह मदद अमेरिका पाकिस्तान को चीन और रूस के खिलाफ कर रहा है।

1965 की लड़ाई-भारत, पाकिस्तान और अमेरिका
जब 1965 का भारत-पाक युद्ध हुआ तब यह साबित हो गया कि पाकिस्तान ने आधुनिकतम अमेरिकी हथियारों से भारत पर चढ़ाई की थी। यह अलग बात है कि भारत के बहादुर सैनिकों ने पाकिस्तान को मुंह तोड़ जवाब देते हुए उसके छक्के छुड़ा दिए। भारत की फौज पाकिस्तान के अंदर बहुत दूर तक चली गई थी। परन्तु रूस के समझाने के बाद भारत ने पाकिस्तान से समझौता कर लिया और जीते हुए क्षेत्र को वापस कर दिया। दुर्भाग्यवश तासकंद में हुए इस समझौते में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की असमय मृत्यु हो गई। परन्तु इस समझौते के दौरान पाकिस्तान ने वायदा किया था कि वह कभी भारत के खिलाफ कोई जंग नहीं छेड़ेगा। पाकिस्तान शीघ्र ही अपनी बातों से मुकर गया और तभी से उसने भारत के खिलाफ आतंकवादी हरकतें शुरू कर दीं। भारत बार बार अमेरिका को समझाता था कि पाकिस्तान जो उसका सहयोगी है, उसने भारत के खिलाफ शत्रुतापूर्ण रवैया अपना लिया है। परन्तु अमेरिका यह मानने को तैयार नहीं था। 1971 में जब बांग्लादेश युद्ध हुआ तो भारत को डराने धमकाने के इरादे से अमेरिका ने अपना एक जंगी जहाज का बेड़ा बंगाल की खाड़ी तक भेज दिया था, लेकिन जब उसे पता चला कि भारत पाकिस्तान के मुकाबले बहुत ही सशक्त देश है तो उसने अपने जंगी जहाज के बेड़े को वापस ले लिया। तभी से अमेरिका का रुख और उसकी सहानुभूति पाकिस्तान के साथ ही रही।

भारत-अमेरिका के संबंधों में आया बदलाव
भारत और अमेरिका के रिश्तों में एक सुखद बदलाव तब आया था जब जॉन एफ कैनेडी अमेरिका के राष्ट्रपति बने थे, लेकिन उनके असामयिक मौत के बाद दोनों देशों के संबंध बिगड़ने लगे। संबंधों में महत्वपूर्ण बदलाव तब आया जब बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति हुए और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उन्होंने दोस्ती का हाथ बढ़ाया। दोनों प्रगाढ़ मित्र हो गए और लगता था कि भारत और अमेरिका के संबंधों में सुखद बदलाव आएगा। परन्तु जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने तब भारत में लोगों को यह आशंका होने लगी कि संभवत: उनका रवैया भारत के प्रति बहुत मित्रवत नहीं हो। परन्तु भारतीय प्रधानमंत्री के प्रयासों से अमेरिका के साथ भारत के संबंध सुधरने लगे और ट्रंप मान गए कि आतंकवादी भारत को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में पाकिस्तान को चेता दिया कि उसकी जमीन से भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों हो रही हैं। यदि इसे तुरन्त नहीं रोका गया तो पाक को इसका खामियाजा भुगतना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि यह रवैया नहीं बदला तो अमेरिका पाक को मदद नहीं देगा।

चीन के खिलाफ अमेरिका

अपनी रक्षा नीति में ट्रंप ने चीन की विस्तारवादी नीति की कटु आलोचना की और कहा कि भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका मिल कर चीन की विस्तारवादी नीति का मुकाबला करेंगे। दक्षिण चीन सागर में चीन जिस तरह अपनी दादागिरी दिखा रहा है उसकी भी आलोचना की गई और कहा गया कि अमेरिका चीन की इस तरह की दादागिरी को बर्दाश्त नहीं करेगा जिसकी वजह से कई देशों की संप्रभुता का हनन हो रहा है। भारत ने पाकिस्तान के ‘वन बेल्ट वन रोड’ का कड़ा विरोध किया है। क्योंकि वह पाक अधिकृत कश्मीर से निकलता है जिसे भारत अपना हिस्सा मानता है। जब अमेरिका ने पाकिस्तान से कहा कि वह मुंबई हमले के मास्टर माइंड हाफिज सईद को गिरफ्तार करे तो पाकिस्तान बौखला गया। उसने अमेरिका को तो कुछ नहीं कहा परन्तु पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार लेफ्टीनेंट जनरल नसीर खान ने भारत और पाकिस्तान में परमाणु युद्ध की धमकी तक दे डाली। पाकिस्तान चाहे जो भी धमकियां दे, अब यह स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका के साथ मजबूत होते रिश्तों के कारण भारत दुनिया में एक नई वैश्विक शक्ति के रूप में उभर गया है और पाकिस्तान के लाख चिल्लाने के बावजूद इस स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होने वाला है।