कोलकाता, [जागरण संवाददाता]। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज सिलीगुड़ी जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण के कार्यक्रम को संबोधित करेंगी। मुख्यमंत्री साथ ही सिलीगुड़ी के कंचनजंघा स्टेडियम में कई सरकारी योजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास करेंगी। गौरतलब है कि इससे पहले मुख्यमंत्री ने दिसंबर के अंतिम सप्ताह में गंगा सागर का दौरा किया था और नववर्ष पर उन्होंने दक्षिण बंगाल में स्थित पूर्व वर्द्धमान, बीरभूम सहित अन्य जिलों का दौरा किया था।

तृणमूल कांग्रेस का ब्राह्मण सम्मेलन, 15000 ब्राह्मण पहुंचे 

आज बीरभूम जिला तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष अनुब्रत मंडल की अगुवाई में जिले के बोलपुर में पुरोहित (ब्राह्मण) सम्मेलन होगा। इसे ममता सरकार के सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड की तरह देखा जा रहा है। जिस तरह भारतीय जनता पार्टी का जनाधार लगातार राज्य में बढ़ रहा है, उसकी काट निकालते हुए तृणमूल ने यह फैसला लिया है। ब्राह्मण सम्मेलन में करीब 15,000 ब्राह्मण हिस्सा लेंगे और पूजा-पाठ करेंगे। हर ब्राह्मण को एक गीता, शॉल और रामकृष्ण परमहंस-शारदा मां की तस्वीर दी जाएगी।

सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पंचायत चुनाव को ध्यान में रख कर दक्षिण बंगाल से लेकर उत्तर बंगाल तक का दौरा कर रही हैं। चुनाव के मद्देनजर ममता ने खुद पार्टी की सांगठनिक कमान संभाल रखी है। उनके सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी भी सक्रिय हैं लेकिन मुकुल राय की जगह भरने के लिए अभी तक तृणमूल कांग्रेस में कोई दूसरी कतार का नेता नहीं उभर सका है। अंदर ही अंदर तृणमूल कांग्रेस में असंतोष बढ़ते जा रहा है। दूसरी ओर मुकुल राय बंगाल में भाजपा की पैठ बनाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं। तृणमूल के असंतुष्ट नेता मुकुल के संपर्क में है। इस माह के अंत में होनेवाले नोआपाड़ा विधानसभा उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस की पूर्व विधायक मंजू बसु को टिकट नहीं मिलने पर वह बगावत की राह पर उतर गईं। मुकुल राय के सहयोग से मंजू बसु ने भाजपा नेतृत्व से संपर्क किया। भाजपा ने मंजू बसु को नोआपाड़ा से पार्टी का उम्मीदवार घोषित कर दिया। नोआपाड़ा से दो बार तृणमूल की विधायक रह चुकी मंजू बसु के भाजपा की उम्मीदवार बनने से वहां तृणमूल के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है।

तृणमूल कांग्रेस के एक और विधायक व विधाननगर के मेयर सव्यसाची दत्त ने एक सार्वजनिक सभा में विद्युत मंत्री शोभनदेव चटर्जी की तीखी आलोचना की और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भी सवाल खड़ा किया। आश्चर्य की बात है कि जिस सार्वजनिक मंच से सव्यसाची ने ममता की आलोचना की वहां पूर्व परिवहन मंत्री मदन मित्रा उपस्थित थे। मदन मित्रा मुख्यमंत्री के करीबी रहे हैं। लेकिन सारधा घोटाला में जेल जाने के बाद उनकी मुख्यमंत्री के साथ दूरियां बढ़ गई।

सव्यसाची ने जब सार्वजनिक मंच से मुख्यमंत्री की आलोचना की तो मदन मित्रा ने कोई आपत्ति नहीं की। ऐसे में सवाल उठता है कि एक समय मुख्यमंत्री के करीबी क्या मदन मित्रा भी उनसे दूरी बना रहे हैं। ममता से तृणमूल कांग्रेस की जिस नेता से दूरियां बढ़ रही है वे भाजपा के करीब चले जा रहे हैं। ममता के लिए यह किसी चुनौती से कम नहीं है। अब देखना है कि इस साल होने वाले पंचायत चुनाव और उसके बाद 2019 में होनेवाले लोकसभा चुनाव में ममता इस चुनौती से कैसे निपटती है।