अगरतला | विधानसभा चुनाव से दो महीने पहले त्रिपुरा के वामपंथी मुख्यमंत्री माणिक सरकार के अगरतला में हिंदू संप्रदाय अनुकूल ठाकुर के समर्थकों के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने से विवाद पैदा हो गया है। चार बार से राज्य के मुख्यमंत्री माणिक सरकार अस्ताबोल स्टेडियम गए जहां प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। वामपंथी मुख्यमंत्री की इस यात्रा का जहां धार्मिक महत्व है, वहीं पार्टी की विचारधारा को मानने वाले कार्यकर्ताओं के लिए इसे स्वीकार कर पाना मुश्किल हो रहा है। उधर, त्रिपुरा के सीपीएम सेक्रटरी बिजन धर ने सीएम के इस कदम का बचाव किया है।

धर ने कहा, ‘उन्होंने किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। उन्होंने केवल स्टेडियम में आयोजित मेडिकल कैंप में हिस्सा लिया जहां कई परीक्षण किए गए।’ उन्होंने कहा, ‘हमारी पार्टी का मानना है कि एक मंत्री धार्मिक संगठन के सामाजिक आयोजन में जा सकता है, जहां उनके सामाजिक क्रियाकलापों और कार्यक्रमों से लोगों का कल्याण हो।’

उन्होंने आगामी चुनाव को देखते हुए सीएम की यात्रा के आरोप को खारिज कर दिया। धर ने कहा, ‘यात्रा को इस तरह से नहीं देखना चाहिए।’ उधर, इस वाम गढ़ में भगवा ध्वज फहराने की हसरत रखने वाली बीजेपी ने अंकुल ठाकुर के कार्यक्रम में माणिक सरकार के शामिल होने पर निशाना साधा है।

त्रिपुरा के बीजेपी के चुनाव प्रभारी और असम के वित्त मंत्री हेमंत विश्व शर्मा ने कहा, ‘इसने सीपीएम के दोहरे मानदंडों का उजागर कर दिया है। जब भाषण की बात आती है तो वामपंथी कहेंगे कि वे नास्तिक हैं। जब वोट लेने की बात आती है तो वे मंदिर, मस्जिद कहीं भी जा सकते हैं।’

बता दें, वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक त्रिपुरा की 36.7 लाख की आबादी में 83.4 प्रतिशत लोग हिंदू हैं। मुस्लिमों की आबादी 8.6 फीसदी है। शर्मा ने कहा, ‘अंकुल ठाकुर के कार्यक्रम में हिस्सा लेने से सरकार को कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि त्रिपुरा के लोगों ने उन्हें हटाने का अपना मन बना लिया है।