प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भले ही प्रधानमंत्री आवास योजना को शुरू कर गरीबों को खुद के घर का स्वप्न पूरा करने का बीड़ा उठाया हो लेकिन असल में स्थिति अभी भी यर्थाथ के धरातल पर नहीं आ सकी है। क्योंकि जिस तरह से हितग्राही लोगांे को योजना की जानकारी संबंधित विभागीय अधिकारियों को देना चाहिए, वह नहीं मिल पा रही है और ऐसे में योजना का लाभ उठाने के इच्छुक लोग यहां से वहां चक्कर लगाने पर मजबूर है।
जिम्मेदार अफसरों की मनमानी का ही यह परिणाम है कि लोगों को न तो सही जानकारी मिल रही है और न ही जल्दी लाभ मिलने में सफलता प्राप्त हो सकी है। हालांकि जिला प्रशासन की तरफ से सर्वे आदि का कार्य जरूर शुरू कर दिया गया है लेकिन बावजूद इसके अभी भी लोगों को जानकारी लेने या योजना का लाभ लेने के लिए चक्कर लगाने पर ही मजबूर होना पड़ रहा है। ये वे लोग है जो गरीबी रेखा के तबके से उपर है तथा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 7 से 9 लाख रूपए तक का सब्सिडी वाला ऋण प्राप्त कर स्वयं के मकान का स्वप्न पूरा करना चाहते है। जरा पूछिए इन लोगों से जो एक नहीं बल्कि कई चक्कर लगाकर जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर चुके है, परंतु मजाल है कि योजना की जानकारी सही ढंग से मिल सकी हो। जिम्मेदार अधिकारी कहते है बैंक में जाकर जानकारी प्राप्त करों तो बैंक के अधिकारी यह जवाब देते है कि अभी गाइड लाइन ही नहीं आई है तो फिर हम आपको क्या जवाब दें….! लब्बोलुआब यह है कि जिनके पास जिम्मेदारी है वे न केवल अपने कार्यालय में समय पर उपलब्ध रहे वहीं लोगों को भी सही ढंग से जानकारी प्रदान करें, ताकि योजना का लाभ लोग अधिक से अधिक संख्या में उठा सके। वरना सरकारी योजनाओं की स्थिति तो पता ही है…..! अर्थात कागजों पर ही सिमट जाती है….लोगों तक तो पहुंच ही नहीं पाती है……!