कर्नाटक के राहुल द्रविड़ को टीम इंडिया का सबसे भरोसेमंद बल्‍लेबाजों में शुमार किया जाता था. अपनी इसी खूबी के कारण द्रविड़ को ‘वॉल’ और ‘मिस्‍टर रिलायबल’ नाम मिला था. द्रविड़ की छवि ऐसे बल्‍लेबाज के रूप में थी जो विकेट पर लंगर डालकर लंबी पारियां खेलता था. उनका डिफेंस इतना मजबूत था कि विपक्षी गेंदबाजों को उन्‍हें आउट करने में पसीना आ जाता था. यही कारण है कि दुनिया के कई दिग्‍गज बॉलरों ने द्रविड़ को आउट करने के लिहाज से सबसे मुश्किल बल्‍लेबाज माना है. कॉपी बुक स्‍टाइल और विकेट पर जमकर खेलने की इस खूबी के कारण द्रविड़ को शॉर्टर फॉर्मेट में काफी ऊंचा रेट नहीं किया जाता था. यही कारण था कि कुछ समय उन्‍हें भारत की वनडे टीम से बाहर भी रहना पड़ा. बाद में विकेटकीपर की जिम्‍मेदारी निभाने की चुनौती स्‍वीकार करने के साथ ही उनकी टीम में विकेटकीपर बल्‍लेबाज के रूप में वापसी हुई. शॉर्टर फॉर्मेट में तेज बल्‍लेबाजी की इन ‘सीमितताओं’ के बावजूद इस बात की जानकारी कम ही लोगों को होगी कि द्रविड़ ने अपने एकमात्र टी20 इंटरनेशनल मैच में लगातार तीन गेंदों पर छक्‍के जमाने का कमाल किया था.

द्रविड़ ने अपना एकमात्र टी20 इंटरनेशनल मैच 31 अगस्‍त 2011 को इंग्‍लैंड के खिलाफ मैनचेस्‍टर में खेला था. इस मैच में उन्‍होंने 21 गेंदों पर 31 रन की पारी खेली थी. खास बात यह है कि इस पारी के दौरान भारतीय टीम के ‘मिस्‍टर वॉल’ ने इंग्‍लैंड के भारतीय मूल के गेंदबाज समित पटेल की लगातार तीन गेंदों पर छक्‍के जमाए थे. वैसे द्रविड़ की इस पारी के बावजूद भारतीय टीम को मैच में 6 विकेट की हार का सामना करना पड़ा था. 11 जनवरी 1973 को मध्‍यप्रदेश के इंदौर शहर में जन्‍मे राहुल गुरुवार को 45 वर्ष के हो गए. आइए जानते हैं, द्रविड़ की जिंदगी और क्रिकेट से जुड़ी सात खास बातें….

1. बेहद कम उम्र में ही राहुल द्रविड़ ने अपनी खास बल्‍लेबाजी तकनीक से अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना शुरू कर दिया था. उन्‍होंने अंडर-15, अंडर-17 और अंडर -19 वर्ग में कर्नाटक की टीम का प्रतिनिधित्‍व किया. स्‍कूल के दिनों में वे विकेटकीपिंग भी करते थे लेकिन बल्‍लेबाजी पर ध्‍यान केंद्रित करने के लिए उन्‍होंने विकेटकीपिंग छोड़ दी. जूनियर स्‍तर पर राहुल की प्रतिभा को तराशने में उनके कोच केकी तारापोर का अहम योगदान रहा.

2. द्रविड़ ने 3 अप्रैल 1996 को सिंगापुर में श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच खेलकर अपने इंटरनेशनल करियर का आगाज किया. इस मैच में वे केवल 3 रन बनाकर आउट हो गए थे. राहुल ने अपना पहला टेस्‍ट मैच जून 1996 में इंग्‍लैंड के खिलाफ मशहूर लॉर्ड्स मैदान पर खेला था. इसी मैच में उनके नाम सौरव गांगुली ने टेस्‍ट करियर का आगाज किया था. जहां सौरव अपने इस पहले टेस्‍ट में शतक जमाकर हर किसी का ध्‍यान आकर्षित करने में सफल रहे, वहीं द्रविड़ 95 रन पर आउट होने के कारण पहले टेस्‍ट में ही शतक बनाने के रिकॉर्ड से चूक गए.

3. द्रविड़ ने 164 टेस्‍ट में 13288 रन (36 शतक, 63 अर्धशतक, औसत 52.31)बनाए. उन्‍हें स्लिप के बेहतरीन फील्‍डर्स में शुमार किया जाता था. द्रविड़ ने टेस्‍ट क्रिकेट में 210 कैच लपके. बेहद आक्रामक अंदाज में क्रिकेट खेलने वाले ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ वीवीएस लक्ष्‍मण के अलावा राहुल द्रविड़ का रिकॉर्ड भी बेहद प्रभावी रहा है.

4. द्रविड़ ने 344 वनडे में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्‍व किया, इसमें उन्‍होंने 39.16 के औसत से 10889 रन बनाए. वनउे में द्रविड़ ने 12 शतक और 83 अर्धशतक बनाए. महान सचिन तेंदुलकर के बाद द्रविड़ ऐसे दूसरे बल्‍लेबाज  हैं जिन्‍होंने टेस्‍ट और वनडे क्रिकेट, दोनों में 10 हजार से अधिक रन बनाए.

5. बेहद शांत स्‍वभाव के द्रविड़ विवादों से हमेशा दूर रहे. अपने लंबे क्रिकेट करियर के दौरान उनका नाम केवल दो बार विवादों में आया. वर्ष 2004 में एक इंटरनेशनल मैच के दौरान द्रविड़ को जैली से गेंद को चमकाते हुए कैमरे में पकड़ा गया था. हालांकि द्रविड़ ने यह काम जानबूझकर नहीं किया था. पाकिस्‍तान के खिलाफ टेस्‍ट सीरीज में कप्‍तान के तौर पर द्रविड़ ने ऐसे समय भारतीय पारी घोषित करने का फैसला लिया था जब सचिन तेंदुलकर 194 रन बनाकर खेल रहे थे. मुल्‍तान टेस्‍ट के दौरान लिए गए द्रविड़ के इस फैसले के कुछ पूर्व क्रिकेटरों ने आलोचना की थी. उनका मानना था कि द्रविड़ को सचिन को दोहरा शतक पूरा करने के बाद ही पारी घोषित करनी चाहिए थी.

6. द्रविड़ ने टेस्‍ट क्रिकेट में पांच दोहरे शतक लगाए हैं. उनका सर्वोच्‍च स्‍कोर 270 रन है जो उन्‍होंने पाकिस्‍तान के खिलाफ अप्रैल 2004 में रावलपिंडी में बनाया था. खास बात यह है कि द्रविड़ ने अपने पांच में से तीन शतक विदेशी मैदानों पर बनाए थे. वनडे में द्रविड़ का सर्वोच्‍च स्‍कोर 153 रन है.

 

7. द्रविड़ ने वर्ष 2006 में पाकिस्‍तान के खिलाफ पहले विकेट के लिए वीरेंद्र सहवाग के साथ 410 रन की पार्टनरशिप की थी.  इस पारी के दौरान सहवाग ने 254 और द्रविड़ ने उनके साथ पारी की शुरुआत करते हुए नाबाद 128 रन बनाए थे. ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ कोलकाता में हुए टेस्‍ट में द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्‍मण के बीच 376 रन की साझेदारी की याद अभी भी भारमतीय क्रिकेटप्रेमियों के दिमाग में ताजा होगी. वर्ष 2000 में खेले गए इस टेस्‍ट में फॉलोआन का सामना करने के बावजूद टीम इंडिया ने जीत हासिल की थी. द्रविड़ ने वर्ष 2006 में पाकिस्‍तान के खिलाफ पहले विकेट के लिए वीरेंद्र सहवाग के साथ 410 रन की पार्टनरशिप की थी.  इस पारी के दौरान सहवाग ने 254 और द्रविड़ ने उनके साथ पारी की शुरुआत करते हुए नाबाद 128 रन बनाए थे. ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ कोलकाता में हुए टेस्‍ट में द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्‍मण के बीच 376 रन की साझेदारी की याद अभी भी भारमतीय क्रिकेटप्रेमियों के दिमाग में ताजा होगी. वर्ष 2000 में खेले गए इस टेस्‍ट में फॉलोआन का सामना करने के बावजूद टीम इंडिया ने जीत हासिल की थी.