प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जादू चार राज्यों में चलेगा या नहीं यह तो इन राज्यों में आने वाले चुनाव परिणाम के बाद ही सामने आयेगा लेकिन जिस तरह से मौजूदा राजनीति की परिस्थितियां परीलक्षित हो रही है उससे उंट किस करवट बैठेगा, फिलहाल कुछ कहा नहीं जा सकता है। यूपी समेत अन्य तीन राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी में उत्साह है क्योंकि मौजूदा समय में केन्द्र की सत्ता भी बीजेपी के ही पास है वहीं देश के विभिन्न राज्यों में भी बीजेपी का ही राज है। इसलिये यह अवश्यंभावी है कि बीजेपी के लोग इन चार राज्यों में भी सत्ता का सुख भोगने का स्वप्न संजोये हुये है। चारांे राज्यों में बीजेपी ने ’मोदी’ के बल पर पूरी ताकत झोंक दी है, ताकि चुनाव परिणाम पार्टी के पक्ष में आये। यूपी की राजनीति में यादव परिवार का दबदबा रहा है लेकिन बीते दिनों जिस तरह से यादव कुनबे में बवाल खड़ा हुआ था उससे बीजेपी की यूपी में आशा और अधिक मजबूत हो गई थी कि यादव कुनबे की लड़ाई का फायदा वहां की जनता उसे अवश्य ही देगी, लेकिन इसके बाद अखिलेश यादव ने जिस तरह से बाजी को पलटाया है, उससे यूपी में एक बार फिर अखिलेश की समाजवादी पार्टी की जीत को सुनिश्चित होने की संभावना को बल मिलने लगा है। बावजूद इसके मोदी एंड पार्टी यूपी में सत्ता का ताज बीजेपी के सिर धारण करने का मंसूबे बांधे हुये है। यहां बीजेपी की मायावती से भी टक्कर है। रही बात पंजाब की तो वहां पहले ही नवजोत सिंह सिद्धु ने बीजेपी को टेंशन दे रखा है। इसके अलावा गोवा में चुंकि मनोहर पर्रिकर का ’राज’ है इसलिये वहां बीजेपी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। उत्तराखंड में हरीश रावत की मजबूती बीजेपी को कहां तक सफल होने देती है, यह अभी गर्त में ही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जादू लोगों के दिलो दिमाग पर छाया हुआ है, इसमें किसी तरह का संशय नहीं है, फिर भी नोटबंदी जैसी निर्णय से जनता के बीच मोदी के प्रति आक्रोश होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। बीजेपी के घोर विरोधी दल चारों राज्यों में नोटबंदी का ही मुद्दा बनाये हुये है। हालांकि जो भी करना है जनता को ही करना है, फिर भी मोदी की बीजेपी में अंदर ही अंदर परिणामों को लेकर धुकधुकी जरूर ही होगी….!