प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजकोट दौरे से पहले शनिवार रात यहां जमकर बवाल देखने को मिला. पोस्टर विवाद पर कांग्रेस और बीजेपी कार्यकर्ताओं में मारपीट की नौबत आ गई. कांग्रेस उम्मीदवार ने अपने समर्थकों के साथ सीएम रुपाणी के आवास का घेराव करने की कोशिश की. इतना ही नहीं गुस्साए कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच भी तनातनी हो गई.

दरअसल, राजकोट पश्चिम सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार इन्द्रनील राज्यगुरु हैं, जो गुजरात के सबसे अमीर कैंडिडेट भी हैं. आरोप है कि यहां के कनैया चौक पर कांग्रेस उम्मीदवार के पोस्टर लगे थे, जिन्हें हटाकर बीजेपी कार्यकर्ताओं ने अपने पोस्टर लगा दिए. इस पर दोनों पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद चल रहा था. आरोप है कि इस खींचतान के बीच शनिवार रात कांग्रेस उम्मीदवार इन्द्रनील राज्यगुरु के भाई के साथ बीजेपी समर्थकों ने मारपीट की.

भाई पर हमले के बाद कांग्रेस उम्मीदवार तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए. जिसके बाद कनैया चौक पर भारी भीड़ जमा हो गई. कांग्रेस उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ मुख्यमंत्री के घर भी पहुंच गए. हालात बेहद तनावपूर्ण होता देख पुलिस ने लाठीचार्ज किया. बाद में पुलिस ने इंद्रनील समेत कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया.

अस्पताल में भर्ती

इन्द्रनील राज्यगुरु के भाई दिव्यनील राज्यगुरु पर 20 अज्ञात लोगों द्वारा हमला करने का आरोप है. फिलहाल दिव्यनील अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है. इन्द्रनील राज्यगुरु का दावा है कि उनके भाई पर हमला करने वाले बीजेपी के कार्यकर्ता थे.

पुलिस हेडक्वार्टर पर पुलिस-कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खींचतान

हंगामे के बाद पुलिस कांग्रेस उम्मीदवार समेत कई नेताओं को हिरासत में ले गई. इसके बाद कांग्रेस कार्यकर्ता बड़ी संख्या में पुलिस हेड क्वार्टर पहुंच गए और अपने नेताओं को छोड़ने की मांग करने लगे. यहां भी पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई, जिसके बाद ने उन पर लाठियां भांजी.

सांसद को भी खानी पड़ी लाठियां

हंगामे के दौरान मौजूद महाराष्ट्र के हिंगोली से कांग्रेस सांसद राजीव सातव को भी लाठियां खानी पड़ीं. इतना ही नहीं मीडियाकर्मी भी पुलिस की लाठियों की चपेट में आ गए.

सांसद राजीव सातव ने इस घटना को गुजरात सरकार की दमनकारी नीति बताया. उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री द्वारा प्रशासन का दुरुपयोग कर हमारे उम्मीदवारों के खिलाफ बर्बरता पूर्वक करवाई की गई. हमारे दो उम्मीदवारों को मारा गया. मेरे साथ भी पुलिस ने मारपीट की. मेरे कपड़े भी फट गए.’

देर रात छोड़ा

पुलिस ने हिरासत में लिए लोगों को करीब 4 घंटे बाद छोड़ दिया. इन सभी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है. जिस पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये लोकशाही नहीं, तानाशाही है.