शुक्रवार को शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन है लेकिन राज्यसभा में तीन  तलाक पर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है कि विपक्षी मांग को मानते हुए सरकार इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजेगी या नहीं। एक तरफ जहां सरकार ने इसे जीएसटी संशोधन बिल के बाद सेकेंड लिस्ट के तौर पर दूसरे स्थान पर रखा था तो वहीं सरकार इस बात पर जोर दे रही है कि इस पर बने गतिरोध को वोटिंग के जरिए खत्म किया जाएगा।

गुरूवार को राज्यसभा के नेता अरूण जेटली ने विपक्ष दलों के इस प्रस्ताव की इसे पहले सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए उनकी इस मांग को खारिज कर दिया। उधर, विपक्ष दल इस बिल पर बने गतिरोध को सुलझाये बिना किसी और बिल पर चर्चा को तैयार नहीं है। लिहाजा, गुरूवार को भारी हंगामा के चलते राज्यसभा को दिन भर के लिए स्थगित करना पड़ा।

राज्यसभा में चर्चा के दौरान सरकार ने कहा कि कांग्रेस इस बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजकर लटकाना चाहती है। सरकार का आरोप है कि इस बिल पर कांग्रेस दोहरा रवैया अपना रही है। उधर, कांग्रेस का दावा है कि एआईएडीएमके, बीजेडी, टीएमसी और एनडीए की पार्टनर टीडीपी सहित 17 दल इस बिल को कमिटी के पास भेजने के पक्ष में हैं।

लोकसभा में बहुमत होने के कारण केंद्र सरकार ने बड़े ही आराम से तीन तलाक बिल को पारित करा लिया था, लेकिन राज्यसभा में उसके लिए यह काम दूर की कौड़ी साबित हो रहा है। लोकसभा में साथ देने वाली कांग्रेस उच्च सदन में आक्रमक मुद्रा में आ गई है. विपक्ष का साफ कहना है कि इस बिल में कई खामियां हैं, जिनके सुधार के लिए इसे सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाना जरूरी है।