नई दिल्ली : देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (SBI) में पांच अन्य बैंकों के विलय को राज्यसभा से मंजूरी मिल गई है. इसके साथ ही एसबीआई ने कुछ बड़े रिकॉर्ड बना लिए हैं. पहला यह कि बैंक का कस्टमर बेस 25 करोड़ से बढ़कर अब 37 करोड़ हो गया है. दूसरा रिकॉर्ड यह कि मर्जर के बाद एसबीआई संपत्ति के मामले में दुनिया के टॉप 50 बैंकों में शामिल हो गया है. एसबीआई में पांच सहायोगी बैंकों के विलय के बाद सरकार की तरफ से कहा गया कि इससे बैंक का लाभ बढ़ाने और ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने में मदद मिलेगी.

कर्मचारियों की छंटनी से इंकार किया
बैंकों के मर्जर से कर्मचारियों की छंटनी की आशंका पर सरकार ने इससे इंकार किया. वित्त राज्यमंत्री शिवप्रताप शुक्ल ने स्टेट बैंक विधेयक पर राज्यसभा में हुई चर्चा के जवाब में यह बात कही. वित्त मंत्री के जवाब के बाद सदन ने इस विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया. लोकसभा इस विधेयक को पहले ही मंजूरी दे चुकी है. आपको बता दें कि स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ पटियाला और स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर का पिछले वर्ष अप्रैल में एसबीआई में विलय हुआ था.

देश भर में एसबीआई की 24 हजार ब्रांच
देश भर में एसबीआई शाआखों की संख्या 24 हजार से ज्यादा और बैंक के एटीएम 59 हजार के करीब है. विधेयक में बैंकों के मर्जर को पूरी तरह से मंजूरी दी गई है. विधेयक पर हुई चर्चा के दौरान कांग्रेस के जयराम रमेश समेत कुछ सदस्यों ने एसबीआई के निजीकरण की आशंका जताई थी. कई सदस्यों ने बैंकों के नियमन एवं निगरानी प्रणाली को दुरुस्त बनाये जाने की जरूरत बतायी. इस पर वित्त राज्यमंत्री ने कहा कि सहयोगी बैंकों के विलय के बाद कोई छंटनी नहीं की गई है.

उन्होंने बताया कि विलय के बाद कुछ कर्मचारी सेवानिवृत्त हुए हैं. उन्होंने कहा कि पांचों सहयोगी बैंकों के विलय का मकसद यही है कि बैंकों की सुविधाएं बेहतर हो सकें. शुक्ल ने कहा कि पहले खाता खुलवाने के लिए दो जमानतदारों की जरूरत होती थी, अब आम आदमी को बैंकिंग सर्विस लेने में कोई परेशानी नहीं आ रही है. एसबीआई मर्ज हुए पांचों बैंकों की कार्यप्रणाली को युक्तिसंगत बनाकर जल्द ही मुनाफे की स्थिति में आ जाएगा.

पीएम नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू की जनधन खाता योजना के तहत 32 करोड़ खाते खोले गए, जिनमें 87 हजार करोड़ रुपये जमा हैं. उन्होंने इस बात को गलत बताया कि जनधन खाते से गरीबों के पैसे काटे गये. शुक्ल ने बताया कि एसबीआई देश का पांचवां सबसे बड़ा नियोक्ता है, जो वर्तमान में दो लाख 70 हजार लोगों को नौकरी दे रहा है.