चीन आधिकारिक तौर पर एक नास्तिक देश है हालांकि पिछले 40 सालों में यहां धार्मिक गतिविधियां बढ़ी हैं. चीन का संविधान वैसे तो किसी भी धर्म का पालन करने की आजादी देता है लेकिन इसके बावजूद चीन में धर्म के रास्ते में कई पाबंदियां हैं. वहीं चीन की सरकार अब अपने देश में इस्लाम को जड़ से खत्म करने के लिए काम कर रही है.

चीन में अब मुस्लिम बच्चों को धर्म और इस्लामिक शिक्षा से दूर रहने की हिदायत दी गई है. चीन में बहुत कम संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग रहते हैं.  शिंजियांग प्रांत में जो भी उईगर समुदाय के मुस्लिम बहुसंख्यक हैं, उनके खिलाफ पहले से ही चीनी अथॉरिटी ने कई प्रतिबंध लगाए हुए है.

शिंजियांग प्रांत के बाद पश्चिमी चीन के ‘लिटिल मक्का’ (गांसू प्रांत) में भी नास्तिक सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी मुस्लिम बच्चों को धर्म और इस्लामिक शिक्षा से दूर रखना चाहती है. छुट्टियों के दौरान ‘लिटिल मक्का’ में हजारों बच्चे कुरान को समझने के लिए मस्जिद आते हैं, लेकिन चीन की सरकार ने इस पर अब प्रतिबंध लगा दिया है.

‘लिटिल मक्का’ में 16 साल से कम उम्र के बच्चों को नमाज और इस्लामिक शिक्षा से दूर रहने के लिए कहा गया है. इन बच्चों के लिए धर्मनिरपेक्ष सिलेबस बनाने को कहा गया है. चीन के अधिकारियों के अनुसार इस बच्चों को काफी फायदा होगा.

चीन में मुस्लिमों को भी कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ता है. शिनजियांग प्रांत में हिजाब पहनने, दाढ़ी बढ़ाने और रमजान महीने में रोजा रखने तक पर मनाही है. चीन की सरकार ने ध्वनि प्रदूषण का तर्क देते हुए सभी 355 मस्जिदों से लाउड स्पीकरों को हटाने के लिए पहले से ही आदेश दे चुकी है.  मस्जिदों के ऊपर चीन का राष्ट्रीय झंडा लगाने का भी आदेश दिया गया है. वहीं दाढ़ी रखने पर भी पाबंदी लगाई गई है.

शिंजियांग के बाद सबसे ज्यादा मुस्लिम समुदाय के लोग पश्चिमी चीन के गांसू प्रांत में रहते हैं. एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार नए आदेशों के बाद  गांसू प्रांत के लोगों में चीन के अध‍िकारियों को लेकर काफी डर है. एक इमाम के अनुसार, ”वर्तमान हालात काफी डरावने हैं. अगर ऐसा ही रहता तो जल्द ही हमारा अस्त‍ित्व खत्म हो जाएगा.

पुलिसवालों को मस्ज‍िदों के जांच के आदेश दिए गए है. वे जांच करते हैं कि कोई बच्चा धार्मिक श‍िक्षा तो नहीं ले रहा है. हालांकि कुछ इमामों नेसूर्योदय से पहले इस्लामिक शिक्षा देने की कोश‍िश की, लेकिन अब डर के कारण उन्होंने ऐसा करना बंद कर दिया है. चीन की कुल आबादी 1 अरब 38 करोड़ है, जिसमें से मुस्लिम सिर्फ 2 करोड़ 10 लाख है.

आपको बता दें कि सत्तारूढ़ पार्टी सीसीपी आधिकारिक तौर पर नास्तिक है. यह राजनीतिक पार्टी अपने मेंबर्स को धार्मिक मान्यताएं रखने से प्रतिबंधित करती है. धार्मिक संगठन या संस्था से जुड़ा पाए जाने पर उन्हें पार्टी से बर्खास्त तक किया जा सकता है.

सरकार का मानना है कि धार्मिक आस्था से वामपंथ की विचारधारा कमजोर होती है. पार्टी के सदस्यों को मार्क्सवादी नास्तिक बनने को कहा जाता है. चीन के पहले कम्युनिस्ट नेता माओत्से तुंग ने ही धर्म को नष्ट करने की कोशिश की थी.