अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप के हैदराबाद दौरे के बीच पुलिस और प्रशासन पॉश इलाके से भिखारियों को हटा कर रिहैबिलिटेशन सेंटर में भेज रहे हैं. इस कार्रवाई के दौरान पुलिस दो ऐसी महिलाओं को भिखारी समझ रिहैबिलिटेशन सेंटर ले आई जो पढ़ी लिखी तो हैं ही साथ ही अमीर घरानों से आती है.

इन दोनों महिलाओं के बारे में पुलिस को तब पता लगा जब उन्होंने महिलाओं के मुंह से फर्राटेदार अंग्रेजी सुनी. इस बारे में जेल सुपरिटेंडेंट के. अर्जुन राव ने बताया कि हैदराबाद के लंगर होज दरगाह में कई भिखारी बैठते हैं. इनमें से हमने 11 नवंबर को 133 महिला भिखारियों को चेरालापल्ली जेल के आनंद आश्रम लाया. वहीं, पुरुष भिखारियों को चंचलगुडा जेल लाया गया.

राव ने आगे बताया कि हमने जब भिखारियों के बैकग्राउंड जानने की कोशिश की उनमें से दो महिला फर्राटेदार अंग्रेजी बोल रही थी. यह देखकर हम हैरान रह गए. जब हमने इनके बारे में पता किया तो दोनों पढ़ी लिखी और अमीर घरों से आती हैं.

इनमें से 50 वर्षीय फर्जोना ने बताया कि वह बिजनेस स्टडीज में पोस्ट ग्रेजुएट है और लंदन में बतौर अकाउंटेंट काम कर चुकी हैं. वहीं, उसका बेटा अमेरिका में आर्किटेक्ट है. उसका दावा है कि वो कुछ साल पहले ही भारत आई है.

पुलिस ने जब महिला के बारे में जानकारी निकाली तो पता लगा कि उसका हैदराबाद के पॉश इलाके आनंदबाग़ में अपार्टमेंट है. पति की मौत के बाद वह बीते कुछ वर्षों से मानसिक तौर पर बीमार है. एक बाबा के कहने पर वह दरगाह में भीख मांग रही है.

पुलिस ने उसके बेटे से संपर्क किया तो वह अपनी मां की खोज में भारत आया हुआ था. पुलिस ने एफ़ीडेविट भरवाकर महिला को उसके बेटे को सौंप दिया है.

वहीं, डिफेन्स कॉलोनी की रहने वाली दूसरी महिला राबिया बसीरा जेल लाए जाने पर जेल अधिकारियों से लड़ पड़ी. उसका दावा है कि वह ग्रीन कार्ड होल्डर है और हैदराबाद में उसकी बड़ी जमीन-जायदाद है. उसके भाइयों ने उसे जमीन से बेदखल कर दिया .

वह अपने भाइयों से संपत्ति के लिए लड़ते हुए मानसिक संतुलन खो बैठी. वो यहां मन की शान्ति के लिए भीख मांग रही थी. उसे भी उसके परिवार वालों को पुलिस ने सौंप दिया है.