नई दिल्लीभले ही सरकार ने एससी-एसटी अत्याचार निवारण संशोधन अधिनियम बिल लोकसभा में पेश कर दिया हो, बावजूद इसके दलित संगठनों ने आज भारत बंद का आह्वान किया है. इस बिल को लेकर इन वर्गों के लोग खासा आक्रोशित हैं. इस बंद का मकसद पूरे देश में सामान्यन जन-जीवन को अव्यवस्थित करना है.

दिल्ली के कनॉट प्लेस समेत कई सड़कों-बाजारों में होगा प्रदर्शन

दलित समुदाय केंद्र सरकार पर अपनी मांगों के लिए दबाव डाल रहा है और अपना संदेश सरकार तक पहुंचाने के लिए समुदाय के कार्यकर्ता दिल्ली के कनॉट प्लेस समेत कई व्यनस्तर सड़कों, बाजारों में प्रदर्शन और रैलियां करेंगे. ये भी प्लान है कि वो जिला मुख्याललय से लेकर केंद्र सरकार तक याचिकाएं भेजी जाएंगी. भारती ने बताया कि संगठन की मांग को लेकर करीब दो करोड़ पोस्टर कार्ड्स प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ संसद में बिल पेश किए जाने के सवाल पर अशोक भारती ने कहा कि ‘पहली बात तो ये कि सरकार का अदालत पर कोई नियंत्रण नहीं है इसलिए कुछ भी हो सकता है और दूसरी बात यह है कि दलितों के बीच आत्मविश्वास पैदा करने को लेकर सरकार का कोई भी फैसला स्पऔष्ट नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दो अप्रैल को सड़कों पर उतरे थे दलित संगठन 

इसी साल 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एससी/एसटी एक्ट 1989) के तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा था कि सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत के बाद ही हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दो अप्रैल को दलित संगठन सड़कों पर उतरे थे. दलित समुदाय ने दो अप्रैल को ‘भारत बंद’ किया था. केंद्र सरकार को विरोध की आंच में झुलसना पड़ा. देशभर में हुए दलित आंदोलन में कई इलाकों में हिंसा हुई थी, जिसमें एक दर्जन लोगों की मौत हो गई थी.