गुवाहाटी l देश के कई इलाकों से सांप्रदायिक हिंसा की खबरें अक्‍सर आती रहती हैं। इस तरह की हिंसा में जहां सामाजिक तानाबाना तो बिगड़ता ही है, जानमाल का भी काफी नुकसान होता है। इन सबके बीच देश में एक ऐसी मस्जिद भी है जहां सांप्रदायिक सौहार्द की अद्भुत मिसाल देखने को मिलती है। जी हां, यहां बात हो रही है असम के काचर जिले में स्थित जामा मस्जिद की।

काचर की जामा मस्जिद के दूसरे फ्लोर पर एक दर्जन अलमारियां हैं। इसमें हिंदू, ईसाई और इस्‍लाम धर्म पर 300 किताबें हैं। ये सभी पुस्‍तकें बांग्‍ला भाषा में हैं। इस मस्जिद के सचिव सबीर अहमद चौधरी हैं। मस्जिद के अंदर पढ़ने के लिए कमरा और लाइब्रेरी बहुत दुर्लभ है लेकिन यहां ये दोनों ही चीजें उपलब्‍ध हैं। इस सुविधा पर चौधरी को गर्व भी है। वह बताते हैं कि इसका उद्देश्‍य लोगों को अन्‍य धर्मों और दर्शन के बारे में शिक्षित करना है।

इस लाइब्रेरी के अंदर कुरान, इस्‍लाम धर्म पर आधारित अन्‍य पुस्‍तकों के अलावा ईसाई दर्शन, वेद, उपनिषद, रामकृष्‍ण परमहंस तथा विवेकानंद का जीवन परिचय और रविंद्रनाथ टैगोर तथा सरत चंद्र चट्टोपाध्‍याय के उपन्‍यास मौजूद हैं। चौधरी कहते हैं, ‘वर्ष 1948 में इस मस्जिद के निर्माण के समय ही मैं इसके अंदर लाइब्रेरी बनाना चाहता था।’

आजादी के समय चौधरी मानवतावादी चिंतक एमएन रॉय के विचारों से बहुत प्रभावित थे जिनका मानना है कि भारत एक प्राचीन देश है लेकिन यहां के अलग-अलग धर्म के लोग एक-दूसरे के बारे में नहीं जानते हैं। चौधरी लोगों की मदद से मस्जिद के अंदर एक पढ़ने का कमरा बनाना चाहते थे ताकि लोग दूसरे धर्मों के बारे में भी जान सकें।

चौधरी ने कहा, ‘हम इस बात से बेहद खुश होंगे कि लाइब्रेरी इस दिशा में थोड़ी भी भूमिका निभा सके।’ उन्‍होंने कहा, ‘स्‍थानीय लोगों की मदद से वर्ष 2012 में मस्जिद के अंदर लाइब्रेरी और पढ़ने का कमरा बनाया गया।’ चौधरी सोनाई स्थित एमसीडी कॉलेज में अंग्रेजी के विभागाध्‍यक्ष हैं। चौधरी ने बताया कि इस लाइब्रेरी में हरेक आयु वर्ग और धर्म के लोग आते हैं। उन्‍होंने कहा कि बराक घाटी में किसी भी मस्जिद के अंदर लाइब्रेरी नहीं है।