भारतीय सेना को इस समय 400 से भी ज्यादा तोपों की जरूरत है. इसमें वो आधुनिक तोपें शामिल हैं जिन्हें भारत-पाकिस्तान और चीन की सरहद पर तैनात किया जाएगा. ये हर मौसम में कारगर तोप हैं जिन्हें अत्यधिक ऊंचाई से लेकर रेगिस्तान या फिर पहाड़ से लेकर बर्फीले पहाड़ों पर तैनात किया जाएगा.

भारतीय सेना के बेड़े में शामिल हो रही सभी तोपें मेक इन इंडिया के तहत तैयार की जा रही हैं. भारतीय सेना को 145 तोपों को मिलने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया है. मई 2018 में धनुष 155/45 कैलिबर वाली तोप का यूजर ट्रायल पोखरण में हो चुका है. आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड को कहा गया है कि 114 तोपों को जल्द तैयार करके भारतीय सेना को सुपुर्द करे.

के-9 वज्र 155 एमएम /52 कैलिबर की होवित्जर तोप है. इसे साउथ कोरिया तैयार करके 100 की संख्या में भारतीय सेना को देगा. इसीलिए मेक इन इंडिया के तहत एलएनटी कंपनी पार्टनरशिप के तहत 2019 नवंबर तक इसे तैयार करके देगी. पहली 10 तोप नवंबर 2018 तक आनी है. इसके बाद 40 तोप 2019 के नवंबर महीने तक और उसके बाद 2020 तक भारतीय सेना को मिलेंगी.

अमेरिका के साथ काफी हल्‍के वजन वाले 145 होवित्‍जर तोपों M777 के सौदे के बाद दो तोप भारत आ चुकी हैं. वहीं 2019 के मार्च से लेकर 2021 के जून के बीच हर महीने 5-5 तोपें आएंगी. अल्ट्रा लाइट होवित्जर तोपों को भारत में चीन की सीमा के निकट और अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा.

एटीएजीएस डीआरडीओ द्वारा तैयार की जा रही आर्टिलरी गन है. भारत फोर्ज के साथ मिलकर इसे तैयार किया जा रहा है. इसकी रेंज 45 किलोमीटर है और एक जगह से दूसरे जगह आसानी से ले जाया सकता है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिल इस प्रोजेक्ट में तेजी लाने के साथ जल्द ही 2019 के ख़त्म होने से पहले भारतीय सेना में शामिल होने को कहा है.