बेंगलुरु
ऐंड्रॉयड मोबाइल फोन में यूनीक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया (UIDAI) का हेल्पलाइन नंबर सेव होने के लिए गूगल ने भले ही मांफी मांग ली हो, पर इस मामले में उसकी तरफ से बड़ी चूक सामने आ रही है। गूगल इंडियाद्वारा शुक्रवार को जारी किया गया बयान सरकारी आदेशों और ट्राई के निर्देशों से बिल्कुल उलट दिखाई दे रहा है। दरअसल, ज्यादातर भारतीय मोबाइल यूजर्स के फोन में UIDAI का हेल्पलाइन नंबर कैसे पहुंचा, यह विवाद बढ़ा तो गूगल इंडिया ने दावा किया कि उसने 2014 में ही अनजाने में UIDAI हेल्पलाइन और आपदा हेल्पलाइन नंबर 112 को कोड कर दिया था।

हालांकि ट्राई के दस्तावेजों से साफ है कि हेल्पलाइन नंबर 112 की सिफारिश अप्रैल 2015 में की गई थी और मई 2016 में जाकर यह सरकारी आदेश के जरिए लागू किया गया। 9 अप्रैल 2015 को जारी एक बयान में ट्राई ने कहा था, ‘भारत में एक प्रभावी और मजबूत एकीकृत इमर्जेंसी कम्यूनिकेशन और रिस्पॉन्स सिस्टम (IECRS) बनाने के लिए ट्राई ने स्वत: संज्ञान लेते हुए IECRS पर आधारित सिंगल नंबर शुरू करने की भी सिफारिश की है। इसकी विशेषताओं में बताया गया था कि नंबर 112 को भारत के लिए एक इमर्जेंसी नंबर के तौर पर स्वीकार किया जाएगा।’

गूगल की इस गलती को सबसे पहले एथिकल हैकर कनिष्क सजनानी ने पकड़ा। उन्होंने ट्वीट किया, ‘क्या गूगल इंडिया का झूठ पकड़ा गया है? अगर 112 (इमर्जेंसी नंबर) को 7 अप्रैल 2015 को प्रस्तावित किया गया और यह 1 जनवरी 2017 को शुरू हुआ तो यह कैसे संभव है कि उन्होंने अनजाने में 2014 में ही इसे अपने सेटअप विज़र्ड में कोड कर दिया था।’