जेएनएन, चंडीगढ़। पूर्व क्रिकेटर आै पंजब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के रोडरेज मामले में सुप्रीम कोर्ट आज फैसला सुनाएगा। कोर्ट के फैसले के बाद ही पता चलेगा कि सियासी शतक लगाने का सपना देख रहे गुरु अपनी सियासी पारी में आउट होते हैं या उनकी नई पारी का आगाज होता है। कोर्ट के फैसले का पंजाब की राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। पंजाब कांग्रेस में फैसले के बाद बड़ा उलट-फेर दिखाई दे सकता है। पंजाब की राजनीति में हलचल तेज हाे गई है आैर सिद्धू के समर्थकाें में खामोशी है।

रोडरेज मामले में कैबिनेट मंत्री नवजोत सिद्धू पर सुप्रीम कोर्ट आज सुना सकता है फैसला

बता दें कि 1988 में पटियाला में कार पार्किंग को लेकर 65 साल के गुरनाम सिंह के साथ सिद्धू का विवाद हो गया था और आरोप है कि इस दौरार हाथापाई तक हो गई थी और बाद में गुरनाम सिंह की अस्‍पताल में मौत हो गई थी। उनकी मौत क कारण हार्ट अटैक बताया गया था। सेशन कोर्ट ने इस मामले में सिद्धू और उनके साथी को बरी कर दिया।

बाद में हाई कोर्ट ने सिद्धू और उनके साथी को गैर इरादतन हत्‍या का दोषी ठहराते हुए तीन साल कैद अौर एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सिद्धू ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की और सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद पिछले दिनों इस पर सुनवाई शुरू हुई।लंबी सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट आज इस पर फैसला सुनाएगा।

पिछली सुनवाइयों में सिद्धू के वकील आरएस चीमा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि हाईकोर्ट ने इस मामले में सिद्धू को सजा सुनाने समय साक्ष्‍यों पर ध्‍यान नहीं दिया। उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि गैर इरादतन हत्या के मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ जो फैसला दिया वह चिकित्सकीय साक्ष्यों पर नहीं था।

जस्टिस जे चेलेमेश्वर व एसके कौल की बेंच के समक्ष उनके वकील आरएस चीमा ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट से जुड़े साक्ष्यों में कई कमियां थीं। दूसरे पक्ष के गवाहों ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष अलग-अलग बयान दिए थे। उनका कहना था कि छह विशेषज्ञ चिकित्सकों के पैनल को जिम्मा दिया गया था कि वह मौत के कारण पर अपनी राय दे, लेकिन इनमें से कुछ को गवाही के लिए नहीं बुलाया गया। केवल दो चिकित्सकों की ही गवाही दर्ज की गई।

पंजाब सरकार की तरफ से पेश वकील ने कहा कि इस बात का कोई सुबूत नहीं है कि पटियाला निवासी गुरनाम सिंह की मौत दिल का दौरा पडऩे से हुई थी, न कि ब्रेन हैमरेज से। सिद्धू को जानबूझकर नहीं फंसाया गया है। राज्य सरकार ने कहा कि निचली अदालत का फैसला रद करने का हाई कोर्ट का आदेश सही है। सिद्धू ने गुरनाम सिंह के सिर पर मुक्का मारा था जिससे ब्रेन हेमरेज में उनकी मौत हुई थी।

यह है पूरा मामला

1988 में सिद्धू का पटियाला में कार से जाते समय गुरनाम सिंह नामक बुजर्ग व्‍यक्ति से झगड़ा हो गया। आरोप है कि उनके बीच हाथापाई भी हुई और बाद में गुरनाम सिंह की मौत हो गई। इसके बाद पुलिस ने सिद्धू और उनके दोस्‍त रुपिंदर सिंह सिद्धू के खिलाफ गैर इरादतन हत्‍या का मामला दर्ज किया। बाद में ट्रायल कोर्ट ने सिद्धू को बरी कर दिया।

इसके बाद मामला पंजाब एवं हाईकोर्ट में पहुंचा। 2006 में हाई कोर्ट ने नवजोत सिंह सिद्धू और रुपिंदर सिंह को दोषी करार दिया और तीन साल कैद की सजा सुनाई। उस समय सिद्धू अमृतसर से भाजपा के सांसद थे और उनको लोकसभा की सदस्‍यता से इस्‍तीफा देना पड़ा था। सिद्धू ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की और सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू की सजा पर अंतरिम रोक लगा दी थी। इसके बाद हुए उपचुनाव में सिद्धू ए‍क बार फिर अमृतसर से सांसद चुने गए।

पंजाब सहित देशभर में कभी भाजपा के स्टार नेता के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले सिद्धू लंबे समय से अमृतसर की नुमाइंदगी करते आ रहे हैं। भाजपा के साथ अकाली दल के रिश्तों को लेकर सिद्धू ने भाजपा से नाता तोड़कर कांग्रेस का हाथ थामा और मंत्री बने। क्रिकेट की तरह सियासत में भी ओपनिंग में ही चौके-छक्के मारने की सिद्धू की कवायद अभी तक रंग नहीं ला सकी है। सिद्धू के मामले में कोर्ट के आने वाले फैसले पर सिद्धू व कैप्टन समर्थक कांग्रेसियों की नजरें टिकी हैं। भाजपा भी सिद्धू के फैसले पर नजरें गड़ाए बैठी है। सिद्धू के खिलाफ फैसला आने के बाद अगर कांग्रेस सिद्धू की सीट पर किसी नए चेहरे को लाती है तो लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा सिद्धू की पत्नी की घर वापसी भी कर सकती है।

कौन होगा सिद्धू की सीट पर उम्मीदवार

अगर सिद्धू के खिलाफ फैसला आता है तो निश्चित तौर पर उन्हें मंत्री व विधायक पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। इस हालात में कांग्रेस सिद्धू की सीट से किसे उम्मीदवार बनाएगी? क्या सिद्धू की पत्नी को कांग्रेस आगे लाना चाहेगी या किसी दूसरे चेहरे को उतारेगी, इसका पता भविष्य में ही चलेगा।

पत्नी को बनाया गया है वेयरहाउस का चेयरपर्सन

कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद किसी को भी बोर्ड या कारपोरेशनों का चेयरमैन नहीं बनाया गया था। मुख्यमंत्री ने शायद मौके की नजाकत को दूर से ही भांपकर एक महीना पहले ही सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर को वेयरहाउस का प्रभार दे दिया था। अगर पंजाब कांग्रेस की नीयत सिद्धू के खिलाफ नहीं हुई तो उनकी पत्नी को सिद्धू की सीट की नुमाइंदगी दे दी जाएगी। इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि नाखुश होकर मुख्य संसदीय सचिव रहने के दौरान जिस प्रकार सिद्धू की पत्नी ने अपनी ही अकाली-भाजपा सरकार की नाक में विभिन्न मुद्दों पर दम कर रखा था उसी एजेंडे पर वह कांग्रेस में काम न शुरू कर दें।