गुड़गांव l गुड़गांव के सेक्टर-45 स्थित एचडीएफसी बैंक की शाखा के एटीएम से छेड़छाड़ कर वहां से कई लोगों के खातों की जानकारी लेकर करीब 15 लाख रुपये निकालने का मामला सामने आया है। जांच में पता चला कि मार्च और अप्रैल के दौरान मशीन में छेड़छाड़ कर करीब 100 लोगों के खाते को हैक किया गया। एक ही बैंक के इतने कस्टमर्स का पैसा निकलने के बाद पुलिस को शिकायत दी गई। वहीं, साइबर क्राइम मामलों के जानकार का कहना है कि कार्ड पैनल (जहां कार्ड लगाते हैं) से छेड़छाड़ कर पैनल में चिप लगा दिया जाता है। लोग जैसे ही कार्ड डालते हैं, खाते से जुड़ी तमाम जानकारी चिप में सुरक्षित हो जाती है। इसके बाद खाते से रुपये निकालने के अलावा अन्य तरह की धोखाधड़ी की जाती है।

पुलिस को दी शिकायत में एचडीएफसी बैंक के अमित साहनी ने बताया कि बैंक के कुछ ग्राहकों के खातों से 1 मई 2018 से रुपये ट्रांसफर होने शुरू हुए। इन ग्राहकों ने बैंक को शिकायत दी। सभी का कहना था कि एटीएम कार्ड इनके पास ही थे जबकि खातों से रुपये निकल गए। दर्जनों शिकायतें आईं तो बैंक ने अपने स्तर पर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि इन सभी ग्राहकों के साथ एक बात सामान्य थी कि इन्होंने मार्च व अप्रैल महीने में सेक्टर-45 स्थित बैंक शाखा के एटीएम से ट्रांजैक्शन की थी।

बैंक ने जांच में पाया कि मार्च में 12, 23 व अप्रैल महीने में 6, 8, 13, 14, 15, 16, 17, 18, 19, 23, 26 और 29 तारीख को एटीएम से किसी ने छेड़छाड़ कर ग्राहकों का डेटा चुरा लिया। इन दिनों में एटीएम से ट्रांजैक्शन करने वालों के खातों से बाद में रुपये निकाल लिए गए। बैंक ने शिकायत पुलिस को दी। अब बैंक की ओर से इन सभी तारीख की सीसीटीवी फुटेज जुटाई जा रही है। फुटेज की जांच के बाद ही मामले से पर्दा उठ सकेगा।

ऐसे करते हैं धोखाधड़ी 
साइबर क्राइम मामलों के एक्सपर्ट इंस्पेक्टर सुधीर ने बताया कि एटीएम में कार्ड डालने वाले स्लॉट के ऊपर उसी तरह का एक स्कीमर (एटीएम कार्ड का डेटा चोरी करने वाली मशीन) लगा दिया जाता है। इसमें एक चिप लगी होती है। ऐसे में जब भी कोई कार्ड मशीन में डालेगा तो ठगों द्वारा लगाई गई चिप में एटीएम कार्ड का डेटा सेव हो जाएगा। इसके साथ ही पिन नंबर डालने वाले बटनों के ठीक ऊपर एचडी कैमरा लगा होता है। इससे पिन नंबर भी सेव हो जाता है। एक बार एटीएम में चिप व कैमरा लगाने के बाद कई दिनों तक ठग उसे नहीं हटाते। काफी डेटा एकत्र होने के बाद चिप को हटा लिया जाता है।

ऐसे बनते हैं क्लोन कार्ड
मशीन के जरिए क्लोन कार्ड बनाए जाते हैं। किसी भी एटीएम कार्ड को इस मशीन में डाला जाता है। मशीन से जुड़े सिस्टम में डिलीट व रीड की कमांड होती है। डिलीट की कमांड देते ही कार्ड में मौजूदा डेटा डिलीट कर दिया जाता है। फिर एटीएम मशीन में स्कीमर चिप से चुराए गए एक कार्ड के डेटा को इस खाली एटीएम कार्ड में रीड कर दिया जाता है। इस क्लोन एटीएम में असल एटीएम कार्ड का डेटा आ जाता है। एटीएम में लगे कैमरे में दर्ज हुआ पिनकोड पहले से ठगों के पास होता है। इसके बाद क्लोन कार्ड से रुपये निकाल लिया जाता है।

मशीन की करें जांच
साइबर क्राइम मामलों के एक्सपर्ट इंस्पेक्टर सुधीर ने बताया कि बदमाश एटीएम के कार्ड पैनल (जहां लोग कार्ड लगाते हैं) से छेड़छाड़ करते हैं। उस पैनल में चिप लगा दिया जाता है। कार्ड डालते ही तमाम जानकारी उस चिप में सुरक्षित हो जाती है। बाद में चिप को एटीएम पैनल से निकाल लिया जाता है। इसके बाद उसमें दर्ज सभी जानकारी का इस्तेमाल कर खाते से पैसे निकाल लिया जाता है। इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए एटीएम के कार्ड पैनल को जरूर ध्यान से देखना चाहिए। यदि कहीं कुछ भी संदिग्ध लगे तो मशीन का उपयोग न करें। इसकी सूचना पुलिस और बैंक को दें।

पिन नंबर बदलते रहें
खातों को सेफ रखने के लिए समय-समय पर एटीएम का पिन भी बदलते रहना चाहिए। अगर हर 3 से 5 माह में एटीएम का पिन बदलते हैं तो इससे खाते व कार्ड को हैक करने की आशंकाएं काफी कम हो जाती हैं।