असम के तेजपुर से बीजेपी सांसद राम प्रसाद शर्मा की बेटी पल्लवी शर्मा सहित असम सरकार के 19 अधिकारियों को 11 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है. पल्लवी शर्मा सहित असम सरकार के 19 अधिकारियों को  ‘पैसे के बदले नौकरी लेने’ से जुड़े मामले में बुधवार को ग‍िरफ्तार किया गया था. अब वे गुवाहाटी केंद्रीय कारागार में बंद हैं.

2016 में हुए असम लोक सेवा आयोग (एपीएससी) की परीक्षा में उत्तर पुस्तिका में उनकी हैंडराइट‍िंग मैच नहीं होने के कारण इन लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

आरोप है कि इस परीक्षा में बड़े स्तर पर धांधली हुई थी. 10 लाख से लेकर 50 लाख रुपये लेकर सीटें बेची गई थीं. गिरफ्तार होने से पहले पल्लवी शिवसागर ज़िले में डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (डीएसपी) के तौर पर तैनात थी.

असम सरकार ने बीते 21 जून को एपीएससी घोटाले में गिरफ़्तार हुए 13 अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, एपीएससी में ‘कैश फॉर जॉब घोटाले’ की जांच कर रही डिब्रूगढ़ पुलिस ने असम सिविल सेवा (एसीएस), असम पुलिस सेवा (एपीएस) और इसकी सहयोगी सेवाओं के अधिकारियों को हैंड राइटिंग टेस्ट के लिए बुलाया था. पुलिस को उत्तर पुस्तिका की फॉरेंसिक जांच के बाद गड़बड़ी की आशंका हुई थी.

डिब्रूगढ़ ज़िले के पुलिस अधीक्षक गौतम बोरा के अनुसार इन अधिकारियों की हेंडराइट‍िंग उत्तर पुस्तिका की लिखावट से मेल नहीं खाती है. वेरिफ़िकेशन के लिए इन लोगों को कुछ काग़जातों पर लिखने के लिए कहा गया था, जिसमें उनकी हैंडराइट‍िंग मैच नहीं हुई.

बुधवार को गिरफ़्तार किए गए लोगों में 13 एसीएस अधिकारी, तीन एपीएस अधिकारी और तीन सहयोगी सेवा अधिकारी हैं. 2016 में असम लोक सेवा आयोग की नौकरियों में जब यह घोटाला सामने आया था, उस समय प्रदेश में तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस पार्टी की सरकार थी.

इन अधिकारियों के चयन के समय राकेश पॉल एपीएससी के अध्यक्ष थे. 2016 में पुलिस ने एपीएससी अध्यक्ष के अलावा आयोग के सदस्य समेदुर रहमान, बसंत कुमार दौले और परीक्षा के सहायक नियंत्रक पबित्रा कैइबार्ता को गिरफ्तार किया था.

अंशुमिता गोगोई नाम की एक उम्मीदवार की श‍िकायत पर केस दर्ज हुआ था.   अंशुमिता गोगोई ने केस किया था कि नौकरी लगाने की ऐवज में उनसे 10 लाख रुपये मांगे गए थे.

वहीं बीजेपी सांसद राम प्रसाद शर्मा ने बेटी की गिरफ्तारी को राजनीति षड्यंत्र बताया है. आपको बता दें कि इन 19 अध‍िकारियों की गिरफ्तार होने के साथ 2 साल में कुल 54 अधिकारियों को गिरफ़्तार किया जा चुका है. इस मामले में कांग्रेस के पूर्व मंत्री नीलमणि सेन डेका के पुत्र राजर्षि सेन डेका भी जेल में हैं.