छतरपुर/हरपालपुर: करीब 30 हजार की आबादी वाले 24 गावों का इकलौता प्राथमिक उप स्वास्थ्य केन्द्र है हरपालपुर में दूर गावों से पैदल चलकर आये मरीजों को डांक्टर एवं स्टाफ की अनुपस्थित में इलाज नसीब नही हो पा रहा है। अस्पताल में जानवरों के विचरण ओर गंदगी के बीच मरीजों के पलंगों से गद्दे चादर गायब रहते है, तो पीने के लिए ठंडा पानी भी नसीब नही हो पा रहा है।अस्पताल का खराब पड़ा कूलर ,फीजर कबाड की शोभा बढा रहा हैं। मरीजों को पर्चा बनाकर बाहर से दवा लाने भेज दिया जाता है। जब कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नि:शुल्क वितरण को आई दवाइयां मेडीकल स्टोर में सेल कर दी जाती है। उल्लेखनीय होगा करीब दो दर्जन कर्मचारियों के स्टाफ के बीच पीएचसी में पदस्थ चिकित्सक श्याम वरण, विष्णु प्रकाश मिश्रा, महिला चिकित्सक ज्योति पटैरिया, अंजना निरंजन, दो स्टाफ नर्स, दो कम्पाउंडर , दो वार्ड वाय, एक आया, चार एमपी डब्ल्यू चार पर्यवेक्षवेक्षक टीकाकरण,एक लैव टैक्निशियन, एक लैव असिस्टेंट का स्टाफ पदस्थ होने के बावजूद भी मरीज को समय पर उपचार नसीब नही हो पा रहा है,कारण उपििस्थत रजिस्टर में उपस्थिति दर्शाकर चलते बनते है, परिसर में स्थित भवन में मुख्य चिकित्सा अधिकारी का भवन खाली होने के बाद भी उस उक्त भवन में कोई चिकित्सक रहने को तैयार नही है कारण यहाँ पर रहने से मरीजों का हर समय नि:शुल्क उपचार करना पड़ेगा, बताते हैं इस बजह से चिकित्सक प्रायवेट रूम लेकर उपस्थिति रजिस्टर में हाजिरी दर्ज कर घर आकर अपना क्लीनिंक संचालित करते आये है । चिकित्सालय में अधिकांश स्टाफ घरों पर प्रायवेट क्लीनिंक संचालित करते आये है, मरीजों का कहना है मामूली ओर गंभीर रोगी या एक्सीडेंटल केश में मरीज को देखते ही रिफर केस बनाकर बाहर ले जाने की सलाह दी जाती हैं । अस्पताल में रैबीज इंजेक्शन व सर्प दंश का हमेशा अभाव बताया जाता हैं। नगर के दीपक , रमेशनेक्या, जीडी अहिरवार, विनोद वर्मा, , संतोष तिवार का कहना हैं, वहीं अधिकारी के निरीक्षण के समय अस्पताल प्रबंधन अव्यवस्थाओ पर पर्दा डालकर व्यवस्थाएं दुरस्त बताता आया हैं ।